चक्रवात मुरासु 2026: कहाँ टकराया और क्या है नाम का अर्थ?
चक्रवात मुरासु 2026 आंध्र प्रदेश के ओंगोल के पास टकराया। जानें इसकी हवा की रफ्तार, नाम का अर्थ, प्रभावित क्षेत्र और UPSC-MPSC के महत्वपूर्ण तथ्य।
चक्रवात मुरासु 2026 आंध्र प्रदेश के ओंगोल के पास टकराया। जानें इसकी हवा की रफ्तार, नाम का अर्थ, प्रभावित क्षेत्र और UPSC-MPSC के महत्वपूर्ण तथ्य।

प्रकाशित: 3 नवंबर 2026 | भूगोल एवं समसामयिक घटनाएँ
भीषण चक्रवाती तूफान मुरासु (Cyclone Murasu) ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 की सुबह आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट को पार किया। यह तूफान ओंगोल के पास तट से टकराया, जिससे तेज हवाएँ चलीं और भारी बारिश हुई।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात ने सुबह 3:30 बजे से 5:30 बजे (भारतीय समय) के बीच तट को पार किया। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जबकि कुछ तेज झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँची।
मुरासु चक्रवात की शुरुआत बंगाल की खाड़ी में हुई थी। तट तक पहुँचने से पहले यह एक भीषण चक्रवाती तूफान में बदल गया। इसके कारण तटीय इलाकों में बाढ़, नुकसान और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
आइए जानते हैं कि यह चक्रवात कहाँ टकराया, इसका नाम मुरासु क्यों रखा गया और बंगाल की खाड़ी में इतने चक्रवात क्यों बनते हैं।
चक्रवात मुरासु 3 नवंबर 2026 की सुबह आंध्र प्रदेश के नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के पास तट से टकराया।
तट से टकराने की प्रक्रिया रात करीब 1 बजे शुरू हुई। इस दौरान तूफान से जुड़े बादल और तेज हवाएँ तटीय क्षेत्रों तक पहुँचने लगीं। सुबह 3:30 बजे से 5:30 बजे के बीच चक्रवात ने तट को पूरी तरह पार कर लिया।
IMD ने तट से टकराने के समय मुरासु को भीषण चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) की श्रेणी में रखा था।
यह श्रेणी हवा की लगातार बनी रहने वाली गति के आधार पर तय की जाती है, न कि किसी एक तेज झोंके के आधार पर।
IMD के अनुसार, भीषण चक्रवाती तूफान में हवा की निरंतर गति लगभग 89 से 117 किलोमीटर प्रति घंटा होती है।
मुरासु अचानक भीषण चक्रवात नहीं बना था। बंगाल की खाड़ी के ऊपर आगे बढ़ते हुए यह धीरे-धीरे शक्तिशाली होता गया।
31 अक्टूबर: बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक अवदाब (Depression) विकसित हुआ।
1 नवंबर: यह प्रणाली चक्रवाती तूफान में बदल गई और इसे मुरासु नाम दिया गया।
2 नवंबर: आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ते हुए यह भीषण चक्रवाती तूफान बन गया।
3 नवंबर: सुबह के समय इसने ओंगोल के पास आंध्र प्रदेश के तट को पार किया।
तट से टकराने के बाद जमीन के ऊपर आगे बढ़ते हुए चक्रवात के धीरे-धीरे कमजोर पड़ने का अनुमान था।
हालाँकि, हवा की गति कम होने का मतलब यह नहीं है कि खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है। चक्रवात कमजोर होने के बाद भी भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बना रह सकता है।

मुरासु का सबसे अधिक तात्कालिक खतरा तटीय आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में था।
विशेष रूप से नेल्लोर, प्रकाशम, बापटला, गुंटूर और कृष्णा जिलों के आसपास के इलाकों में तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका थी।
तेज हवाओं और बारिश के कारण कई तरह की समस्याएँ पैदा हो सकती थीं, जैसे:
निचले इलाकों में जलभराव।
पेड़ों और बिजली के खंभों का गिरना।
बिजली आपूर्ति बाधित होना।
सड़कों और परिवहन सेवाओं पर असर पड़ना।
तटीय बस्तियों में नुकसान का खतरा।
IMD ने यह भी चेतावनी दी थी कि समुद्र में तूफानी ज्वार (Storm Surge) के कारण पानी का स्तर सामान्य खगोलीय ज्वार से लगभग 1 से 1.5 मीटर अधिक हो सकता है।
यह मौसम विभाग का पूर्वानुमान था, वास्तविक बाढ़ की माप नहीं।
बारिश का खतरा केवल तटीय आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं था। रायलसीमा, तेलंगाना, तमिलनाडु और आसपास के कुछ क्षेत्रों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के कदम उठाए और सुरक्षा संबंधी चेतावनियाँ जारी कीं।
प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि वे चक्रवात कमजोर होने के बाद भी स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह का पालन करें।
मौसम की ताजा चेतावनियों के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
मुरासु (Murasu) एक तमिल शब्द है, जिसका अर्थ पारंपरिक बड़ा ढोल या नगाड़ा होता है।
तमिल संस्कृति में इस तरह के वाद्ययंत्र का उपयोग ऐतिहासिक रूप से उत्सवों, समारोहों और महत्वपूर्ण संदेशों की घोषणा के लिए किया जाता रहा है।
इस चक्रवात के लिए मुरासु नाम भारत ने सुझाया था।
लेकिन यहाँ एक दिलचस्प बात है।
चक्रवात का नाम इसलिए नहीं रखा गया क्योंकि वह भारत की ओर बढ़ रहा था।
दरअसल, चक्रवातों के नाम पहले से तय की गई सूची से लिए जाते हैं। इस सूची को संबंधित देशों की सहमति से तैयार किया जाता है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization – WMO) क्षेत्रीय व्यवस्था के माध्यम से इस नामकरण प्रणाली का समन्वय करता है।
वर्ष 2020 में उत्तरी हिंद महासागर के चक्रवातों के लिए 169 नामों की एक सूची जारी की गई थी।
इस सूची में 13 देशों ने 13-13 नाम दिए थे।
यह नामकरण व्यवस्था बंगाल की खाड़ी और अरब सागर, दोनों में बनने वाले चक्रवातों पर लागू होती है।

चक्रवातों को नाम देने का मुख्य उद्देश्य उनकी पहचान आसान बनाना है।
जब एक ही समय में अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में कई तूफान बनते हैं, तो नामों की सहायता से मौसम विभाग, सरकार, समाचार माध्यमों और आम लोगों के बीच जानकारी स्पष्ट रूप से पहुँचाई जा सकती है।
इससे चेतावनियाँ जारी करने और किसी विशेष तूफान के बारे में जानकारी साझा करने में भी आसानी होती है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि चक्रवात का नाम उसकी ताकत नहीं बताता।
भारत में चक्रवात मुख्य रूप से मानसून से पहले और मानसून के बाद के मौसम में देखने को मिलते हैं।
विशेष रूप से अक्टूबर और नवंबर के महीने बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
लेकिन सवाल है कि बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने की संभावना अधिक क्यों रहती है?
इसका संबंध समुद्र के गर्म पानी, हवा में मौजूद नमी और वायुमंडलीय परिस्थितियों से है।
समुद्र की सतह गर्म होने पर उसके ऊपर की गर्म और नम हवा ऊपर उठने लगती है। इससे नीचे कम वायुदाब वाला क्षेत्र बनता है।
आसपास की हवा इस कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर बढ़ती है और ऊपर उठने लगती है।
जब हवा में मौजूद जलवाष्प ठंडी होकर बादलों में बदलती है, तो ऊष्मा निकलती है। यह ऊर्जा अनुकूल परिस्थितियों में तूफान को और शक्तिशाली बनाने में मदद करती है।
पृथ्वी के घूमने के कारण हवा की दिशा भी मुड़ती है। इस प्रभाव को कोरिऑलिस प्रभाव (Coriolis Effect) कहा जाता है।
यदि समुद्र और वायुमंडल की परिस्थितियाँ अनुकूल हों, तो यह प्रणाली धीरे-धीरे एक संगठित, घूमने वाले चक्रवाती तूफान में बदल सकती है।
बंगाल की खाड़ी में ऐसी परिस्थितियाँ विकसित हो सकती हैं जो चक्रवातों को बनने और मजबूत होने में मदद करती हैं।
इसके अलावा, खाड़ी के आसपास के कई तटीय इलाके निचले और समतल हैं। इसलिए तूफानी ज्वार आने पर वहाँ बाढ़ का खतरा अधिक हो सकता है।
हालाँकि, हर कम दबाव वाला क्षेत्र चक्रवात नहीं बनता।
समुद्र के पानी का तापमान, अलग-अलग ऊँचाइयों पर हवा की गति और दिशा में बदलाव तथा अन्य वायुमंडलीय परिस्थितियाँ तय करती हैं कि कोई तूफान शक्तिशाली होगा या कमजोर पड़ जाएगा।
प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
मुरासु चक्रवात कब तट से टकराया? | 3 नवंबर 2026 |
चक्रवात कहाँ टकराया? | ओंगोल के पास, आंध्र प्रदेश |
इसका निर्माण किस समुद्री क्षेत्र में हुआ? | बंगाल की खाड़ी |
तट से टकराते समय इसकी श्रेणी क्या थी? | भीषण चक्रवाती तूफान |
तट से टकराते समय हवा की निरंतर गति कितनी थी? | 100–110 किमी/घंटा |
मुरासु नाम किस देश ने दिया? | भारत |
मुरासु का अर्थ क्या है? | पारंपरिक तमिल ढोल या नगाड़ा |
चक्रवातों के क्षेत्रीय नामकरण का समन्वय कौन करता है? | WMO, WMO/ESCAP चक्रवात पैनल के माध्यम से |
1. मुरासु चक्रवात का निर्माण किस जलक्षेत्र में हुआ था?
A. अरब सागर
B. बंगाल की खाड़ी
C. मेडागास्कर के पास हिंद महासागर
D. मन्नार की खाड़ी
2. मुरासु चक्रवात का नाम किस देश ने सुझाया था?
A. बांग्लादेश
B. श्रीलंका
C. भारत
D. थाईलैंड
3. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, भीषण चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) में हवा की निरंतर गति कितनी होती है?
A. 31–49 किमी/घंटा
B. 50–61 किमी/घंटा
C. 62–88 किमी/घंटा
D. 89–117 किमी/घंटा
सही उत्तर: 1–B, 2–C, 3–D
चक्रवात मुरासु एक बार फिर याद दिलाता है कि भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्रों में मौसम कितनी तेजी से बदल सकता है।
3 नवंबर 2026 को ओंगोल के पास इसका तट से टकराना एक महत्वपूर्ण मौसमी घटना थी।
लेकिन इस चक्रवात के बारे में जानना केवल वर्तमान घटनाओं को समझने के लिए ही उपयोगी नहीं है।
यह समझना भी जरूरी है कि चक्रवात कैसे बनते हैं, उनकी तीव्रता कैसे तय की जाती है और उनके नाम कैसे रखे जाते हैं।
ये विषय भूगोल और समसामयिक घटनाओं के अंतर्गत UPSC, MPSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी चक्रवात का खतरा तट से टकराने के बाद तुरंत समाप्त नहीं होता।
हवा की रफ्तार कम होने के बावजूद भारी बारिश, जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याएँ बनी रह सकती हैं।
इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को हमेशा मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करना चाहिए।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) — उत्तरी हिंद महासागर के चक्रवातों के नाम
Reuters — भारत के पूर्वी तट पर चक्रवात मुरासु के टकराने की रिपोर्ट
नोट: इस लेख में 3 नवंबर 2026 की सुबह तक उपलब्ध जानकारी दी गई है। मौसम की ताजा स्थिति, चक्रवात संबंधी चेतावनियों और सुरक्षा निर्देशों के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) तथा स्थानीय प्रशासन के आधिकारिक अपडेट देखें।
लेखक
Jayesh Gavit
IT इंजीनियर और कंटेंट क्रिएटर, JGblogs
टेक्नोलॉजी और नई चीज़ें बनाने के शौकीन IT इंजीनियर। 2026 में JGblogs की शुरुआत की — ताकि सरकारी योजनाएं, नौकरियां और करियर गाइड हर भारतीय तक उनकी भाषा में, मुफ्त पहुंच सकें।
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